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दीन दुखियों की सेवा करना ही ईश्वर पूजा के समान है-स्वामी कैलाशानंद

Publish Date: 06-12-2018 Total Views :19

दीन

हरिद्वार,  दीन दुखियों की सेवा करना ही ईश्वर पूजा के समान है। उक्त उद्गार श्रीदक्षिण काली पीठाधीश्वर म.म.स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में सतकर्म करने चाहिए और सच्चाई के मार्ग पर चलना चाहिए। सच्चाई के मार्ग पर चलने वालांे की हमेशा विजय होती है। क्योंकि झूठ फरेब अधिक दिन नहीं चलता। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि गऊमाता की सेवा, गंगा को प्रदूषण से मुक्त रखना देश के सभी लोगों का कर्तव्य हैं। गऊमाता में तैंतीस करोड़ देवी देवताओं का वास है। इसीलिए हिंदूधर्म में गऊमाता की सेवा को सर्वोपरि महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि सिद्धपीठ मां काली के दरबार में जो भी मनुष्य अपने मन में जो मुराद लेकर आता है। मां काली उनकी सभी मुराद पूर्ण करती है। और भक्तों के परिवारों में सदा सुख समृद्धि का वास होता है। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि मनुष्य को सदा दान पुण्य करना चाहिए। ऐसा करने से ईश्वर भी अपने भक्तों से सदा प्रसन्न रहते हैं। क्योंकि दान देने वाले से दान लेना वाला महान कहलाता है। और यही मनुष्य के जीवन को स्वर्ग की और ले जाता है। उन्होंने कहा कि माता पिता की सेवा करना ईश्वर की पूजा के समान है। जो शिष्य अपने गुरूजनों की सेवा करते हैं। और उनके बताए मार्ग पर चलते हैं। उनके सभी अधूरे काम ईश्वर पल भर में पूर्ण कर देते हैं। माता पिता की सेवा गुरूजनों की सेवा करने वाला शिष्य महान कहलाता है। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि गंगा के तट पर मां गंगा में स्नान करने से और गंगा जल का आचमन करने से मनुष्य को जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है। क्योंकि मां गंगा समस्त जग की पालनहार है। मां गंगा की शरण में जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से आता है। मां गंगे मैया उसका जीवन भवसागर से पार लगा देती है। सभी भक्तों से अपने घरों में तुलसी का पौधा लगाने का आह्वान करते हुए स्वामी कैलाशानंद ने कहा कि घर में तुलसी का वास होने से अनष्टिकारी शक्तियां प्रभावहीन हो जाती हैं। परिवा से नकारात्मकता का वातावरण समाप्त हो जाता है और सकारात्मक शक्तियों का वास होता है। जिससे परिवारों में सुख समृद्धि का वास होता है।