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दरगाह साबिर पाक(रह०)की मेला वाली जमीन की सच्चाई(हकीकत) पूर्व प्रधान रौनक अली

Publish Date: 25-10-2020 Total Views :16

दरगाह

पिरान कलियर/मनव्वर क़ुरैशी।पूर्व प्रधान रौनक अली आपको अवगत कराना चाहता हूं कि दरगाह साबिर पाक (रह०) की मेले  वाली जमीन का रहस्य इससे मुतालिक सबसे पहला आदेश 1985 मैं सेवादारों के पक्ष में आया उसी आदेश को 2014 में हाईकोर्ट ने यथावत रखा और सही माना और उसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने भी  सही मानते हुए कायम रखने को कहा । 1985 के आदेश के अलावा कोई भी आदेश सेवादारो के पक्ष में नही आया

आज की तारीख में उस आदेश पर हमारा कोई विवाद नही है परंतु  हमारा विवाद इस बात पर है कि इन्हें 1985 के आदेश में कही भी मेला भूमि यानीं खसरा नं० 79 व 90 नही दिए गये और 1985 के आदेश की आड़ में ये मेला भूमि कब्ज़ाना चाहते हैं। इन्हें 1985 के आदेश में निम्नलिखित खसरा नंबर मीले है जो निम्न है:- 

*61, 62, 117, 119, 20 ज्ञ, 202, 224, 226, 228, 230, 231, 232, 233, 237,   252, 438, 399, 400, 436, 440, 441, 653, 657, 442, 659, 660, 398, 401, 402, 403, 404, 405, 408, 406, 407, 434, 435, 436, 438, 439, 448, 472, 473, 477, 649, 646, 584, 594, 566, 597, 598, 599, 379, 395, 353, 561, 462, 736, 194, 61, 194, 408, 431, 433, 528, 202,* और इनमे कही भी खसरा नं०79 और 90 नही है।

हमारा विवाद 27/11/2000 में शुरू हुआ है जो सेवादारों ने चकबंदी के दौरान 1985 के आदेश में जो ज़मीन जीती थी वे गलत तरीके से हवाई चक उठवाकर  खसरा नंबर 79,90 पर 27/11/2000 में लगवा लिये थे। क्योंकि किसी प्राइवेट व्यक्ति किसी के चक सीलिंग की या दरगाह की ज़मीन पर नहीं लगाए जा सकते,  जब दरगाह को पता चला तो उस आदेश के खिलाफ दरगाह प्रबंधन 3/1/2004 में उसके विरुद्ध रिट दाखिल की और 20/3/2006 में गलत तरीके से लगवाए गए चकों के खिलाफ आदेश हुआ उस आदेश को लेकर मनसूर मियां आदि हाईकोर्ट गए वहां से भी  मंसूर मिया आदि को कोइ अनुतोष नही मिला बल्कि  दरगाह को धारा 5 का लाभ देते हुए आदेश दरगाह के हक में किया  और  फ़ाइल को वापस एस० ओ० सी० के यहां रिमांड करदी जो आज भी विचाराधीन है ।

आपको यह भी बताते चले कि मेले वाली ज़मीन पर हाई कोर्ट ने दिनांक 7/10/20  को यता स्थिति का stay कर दिया है और अब इंशाअल्ला इस ज़मीन से कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकेगा।